अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के 22वें दिन, भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत की।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ईद और नवरोज के मौके पर उन्हें शुभकामनाएं दीं और ईरान द्वारा भारतीय नागरिकों को दी गई मदद के लिए आभार व्यक्त किया।
इस बातचीत में दोनों नेताओं ने मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर भी विस्तार से चर्चा की और शांति बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। Narendra Modi ने कहा कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही किसी भी तनावपूर्ण स्थिति का समाधान निकाला जा सकता है।
वहीं Masoud Pezeshkian ने भी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं और इससे वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। इस पूरी बातचीत की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने आखिर क्या कहा भारतीय नागरिकों को लेकर Masoud Pezeshkian से?
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान का धन्यवाद किया कि वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है और उन्हें हर संभव मदद दी जा रही है। उन्होंने इस सहयोग के लिए ईरान की सराहना की।
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के रिश्तों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।
साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि त्योहारों का यह समय पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और तरक्की लेकर आएगा।
PM Narendra Modi ने की हमलों की निंदा
PM Narendra Modi ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से बातचीत के दौरान क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी प्रभावित करते हैं।
उन्होंने समुद्री रास्तों की आज़ादी बनाए रखने और जहाज़ों के लिए सुरक्षित व खुले मार्ग सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
गौर करने वाली बात यह है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की वजह से Strait of Hormuz प्रभावित हुआ है, हालांकि अभी कुछ देशों के जहाज़ों को वहां से गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
PM Modi ko ईरानी राष्ट्रपति के द्वारा दी गयी मौजूदा स्थिति की जानकारी
यहाँ पर हम आपको यह भी बता देना चाहते हैं कि 12 मार्च को ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने PM Narendra Modi से बातचीत में अपने देश की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और क्षेत्र में हाल की घटनाओं पर अपना नजरिया साझा किया था।
Masoud Pezeshkian ने Narendra Modi से फ़ोन पर बातचीत करते हुए विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की।
इस पर PM Modi ने जरूरी सामान और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर इसमें किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर लंबे समय तक पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि देश में जरूरी सामान और ऊर्जा की सप्लाई लगातार और भरोसेमंद बनी रहना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर इन चीजों की सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था और विकास पर बुरा असर पड़ सकता है, साथ ही पूरे क्षेत्र की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सप्लाई चेन का बिना रुके चलना देश के विकास, उद्योगों के कामकाज और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है। अगर इसमें बाधा आती है, तो निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और आर्थिक प्रगति धीमी पड़ सकती है, जिसका असर आसपास के देशों पर भी पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए सही योजना बनाना और मिलकर काम करना बहुत जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की रुकावट को रोका जा सके।
शांति के लिए कूटनीति: वैश्विक नेताओं से भारत की सक्रिय बातचीत
संघर्ष शुरू होने के बाद से ही PM Modi ने कई देशों के नेताओं से बातचीत की है, जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, Bahrain, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया।
इन बातचीतों में उन्होंने बार-बार कहा कि भारत शांति और स्थिरता चाहता है, चाहे वह इस क्षेत्र में हो या दुनिया के किसी भी हिस्से में। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस तरह के संघर्ष का हल केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है, न कि हिंसा या युद्ध से।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत शांति के लिए किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने सभी देशों से मिलकर जिम्मेदारी निभाने और साथ काम करने की अपील की।
कुल मिलाकर, उनका संदेश यही रहा कि समस्याओं का समाधान बातचीत, समझदारी और सहयोग से ही संभव है।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव: युद्धविराम ठप, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट गहराया
पहले हमलों के बाद 22 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, संघर्ष को कम करने या युद्धविराम (सीज़फायर) तक पहुँचने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।
दोनों पक्षों के बीच संबंध अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। आपसी अविश्वास, लगातार झड़पों और सैन्य गतिविधियों के कारण बातचीत या तो पूरी तरह ठप पड़ गई है या बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन फिलहाल उनसे कोई निर्णायक परिणाम निकलता हुआ नहीं दिख रहा है।
इस संघर्ष का असर अब पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा कारणों से इस मार्ग पर प्रभावी रूप से नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई है, जिससे जहाजों की आवाजाही बाधित हो रही है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
हालांकि कुछ देशों के जहाजों को कड़ी निगरानी और सुरक्षा जांच के साथ गुजरने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील और अनिश्चित बनी हुई है।
किसी भी समय हालात और बिगड़ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता जता रहा है।
दुनिया के कई देश और संगठन आशंका जता रहे हैं कि अगर तनाव और बढ़ा, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय स्थिरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
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इसलिए सभी पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की जा रही है।